गरियाबंद-जिला

कांग्रेस का यह निर्णय कार्यकर्ताओं में क्या वह जोश भर पायेगा जिसका अभी कांग्रेस को जरूरत है?

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सामंजस्य के फेर में कांग्रेस राजिम में और कमजोर होगी

गरियाबंद…..कांग्रेस हाईकमान ने गरियाबंद जिला अध्यक्ष पद के लिए चली दौड़ में दो सशक्त दावेदार—युगल किशोर पांडे और भवानी शंकर शुक्ला—को पीछे छोड़ते हुए देवभोग–बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के सुखचंद बेसरा को नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह निर्णय पार्टी के भीतर आने वाले कल में असंतोष की लहर ही पैदा कर सकती हैं।
बिंद्रानवागढ़ विधानसभा से लंबे समय बाद कांग्रेस को मिली जीत को ध्यान में रखते हुए हाईकमान ने वहां से जिला अध्यक्ष बनाने को रणनीतिक रूप से मजबूत माना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो दिग्गज दावेदारों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से सुखचंद बेसरा को तीसरे विकल्प के रूप में चुना गया है।

कार्यकर्ताओं का तर्क है कि देवभोग जिला मुख्यालय से 130 किलोमीटर दूर एवं, राजिम, फिंगेश्वर और छुरा जैसे क्षेत्र से 200 किलोमीटर दुर है, विपक्ष में रहते हुए लगातार धरना आंदोलन और प्रदर्शन कांग्रेस का जारी रहेगी ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क, आंदोलन,धारना प्रदर्शन और संगठनात्मक गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखना कैसे संभव होगा। इससे पार्टी कायँकतोँ मे सक्रियता और मजबूती प्रभावित भी हो सकती है।

पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि वर्षों से जिला के राजनीति पर प्रभाव रखने वाले शुक्ला बन्धु का परिवार जिनके परदादा मध्य प्रदेश और दादा तीन-तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे पिता प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे, वही कांग्रेस के उदय से लेकर अब तक पांडे परिवार ने कांग्रेस के लिए सब कुछ निछावर ही रात रात भर जाकर राजिम और बिंद्रा नवागढ़ में कांग्रेस का प्रचार किया है आज कुछ कांग्रेस से पाने के अवसर पर किसी और कांग्रेस अध्यक्ष के इशारों पर क्या ये चल पाएंगे? यही सब बातें कांग्रेस के लिए आगामी समय में नुकसानदायक साबित होगा, ऐसी स्थिति में इतने बड़े राजनीतिक कद वाले नेता किसी तीसरे के नेतृत्व मे तालमेल बिठाने में कितना सहज होंगे? हालांकि सुखचंद बेसरा पूर्व में पंचायत के साथ ही जिला कांग्रेस में पद संभाल चुके हैं…. किंतु फिर भी राजिम फिंगेश्वर गरियाबंद छुरा मैनपुर के कार्यकर्ताओं में वह निकटता नहीं बना पाए हैं जो कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनका काम आता ऐसे में संगठन मे वरिष्ठों की निष्क्रियता आने की पूरी आशंका है।कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह निर्णय कांग्रेस के लिए आगामी चुनावों में जोखिम भरा साबित हो सकता है।

यह अलग बात है कुछ आतिशबाज़ी कर खुशी मनाने वाले गिनती के कार्यकर्ताओं को छोड़ दें तो वह उत्साह और उमंग दिखाई नहीं दे रहा है, जो संगठन के भविष्य के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, दो दिग्गजों के बीच तीसरा विकल्प लाकर संतुलन साधने का हाईकमान का प्रयास कितना सफल होता है यह तो अब भविष्य के गतँ में है किंतु जो लक्षण वर्तमान में दिख रहे हैं वह सहज नजर नहीं आता। आने वाला समय बताएगा कि सुखचंद बेसरा का नेतृत्व कांग्रेस को मजबूत करेगा या फिर यह फैसला पार्टी के लिए नुकसान दायक साबित होगा।

इस फैसले पर शुक्ल एवं पांडे क्या कहते हैं

इस संबंध में जिला अध्यक्ष के सशक्त दावेदार भवानी शंकर शुक्ला एवं युगल किशोर पांडे से भी बात करने का प्रयास किया गया… जिसमें भवानी शंकर शुक्ल इस फैसले पर ..नो कमेंट्स की बात कहते हैं ।वहीं युगल किशोर पांडे को फोन लगाने पर उनका फोन स्विच ऑफ बतला रहा है

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