**गरियाबंद:** स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिले में यातायात विभाग और पुलिस का संयुक्त अभियान तेज हो गया है। कल नाबालिक वाहन चालकों पर कार्यवाही के बाद आज पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के निर्देश पर स्कूल बसों की सघन जांच की गई।
जिला आरटीओ अधिकारी सुश्री योगेश्वरी वर्मा के साथ ट्रैफिक पुलिस की टीम ने बसों में फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC), अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक उपचार किट, इमरजेंसी एग्जिट, स्पीड गवर्नर और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की। कई बसों में सुरक्षा मानकों की कमी पाए जाने पर लगभग 10 हजार रुपये का ई-चालान वसूला गया।
इसके अलावा एक थार वाहन पर लगाई गई काली फिल्म को भी हटाया गया। बस संचालकों को सख्त हिदायत दी गई कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े किसी भी मानक की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमियां दूर करने के लिए तत्काल निर्देश दिए गए।

**एसपी वेदव्रत सिरमौर** ने कहा, “स्कूल बसों की जिम्मेदारी आम वाहनों से कहीं ज्यादा है। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा की उम्मीद करते हैं। फिटनेस, फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स और इमरजेंसी एग्जिट जैसी व्यवस्थाएं महज कागजी नहीं, बल्कि बच्चों का सुरक्षा कवच हैं। बिना इनके वाहन चलाना जान जोखिम में डालने के समान है।”
उन्होंने वाहन मालिकों और स्कूल प्रबंधनों से अपील की कि सभी दस्तावेज समय पर नवीनीकृत रखें और वाहन पूरी तरह सुरक्षित हालत में ही चलाएं। गरियाबंद पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह विशेष अभियान जिले भर में लगातार जारी रहेगा और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

अभियान के दौरान एक सकारात्मक नजारा भी देखने को मिला। जब टीम अचानक बसों की जांच करने पहुंची तो बच्चे पहले तो चौंक गए, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि यह उनकी सुरक्षा के लिए हो रहा है, तो उनके चेहरों पर मुस्कान आ गई। बच्चों ने उत्सुकता से अधिकारियों से सुरक्षा उपकरणों के बारे में सवाल पूछे। पुलिसकर्मियों ने भी बच्चों से सड़क सुरक्षा के नियमों पर बातचीत की।



